पाप कितने प्रकार के होते हैं !

पाप कितने प्रकार के होते हैं !

पाप कितने प्रकार के होते हैं

दोस्तों इस सवाल का जवाब विशेषकर उन्हीं लोगों के लिए है जो ईश्वर पर विश्वास करते हैं, ईश्वर को मानते है, और जो सच में पाप कर्मों से बचना चाहते हैं, तो सबसे पहले हमारा ये जानना जरूरी है, कि वह कौन कौन से कर्म है, जो पाप की श्रेणी में आते हैं, और वे कितने प्रकार के होते हैं, आपको बता दें कि हमारे धर्म ग्रंथों में कई प्रकार के पाप बताए गए हैं, लेकिन हमने उन सभी पापों को चार भागों में बांट दिया है, जो इस प्रकार है!

तो चलिए आज हम आपको बताते है कि पाप कितने प्रकार के होते है,

1. तनशा पाप

तनशा पाप यानी ऐसा पाप जो हम अपने तन के द्वारा करते हैं, जैसे चोरी, डकैती करना, हिंसा करना, स्त्रियों से दुराचार करना, या दुनिया के किसी भी प्राणी को किसी भी प्रकार से कष्ट पहुंचाना तन से होना वाला पाप है!

2.मनसा पाप

मनसा पाप यानी ऐसा पाप जो हम केवल अपने मन में ही करते हैं, जैसे अपने मन में किसी के प्रति घृण्रा या ईर्ष्या का भाव रखना, किसी प्राणी पर क्रोध करना, किसी स्त्री ( महिला ) के लिए मन में बुरा, गंदा, विचार रखना, किसी का बुरा चाहना, यानि जो भी हम मन किसी से के लिए गलत करते है, उसे मन से होने वाले पाप यानि वो मनसा पाप होता है!

3.वचना पाप

वचना पाप यानी ऐसा पाप जो हम बोल कर करते है, बचन से होने वाले पाप जैसे हम अपने अप्रिय वचन से किसी को दुख पहुंचाना, असत्य बोलना किसी की निंदा करना, चुगली करना, या किसी से झूठा वादा करना बचन से होने वाले पाप है!

4.धनसा पाप
धनसा पाप यानी ऐसा पाप जो हम धन से करते है, जैसे अपने धन का दुरुपयोग करना, उसे जुआ शराब और वेश्यावृत्ति जैसे बुरे कर्मों के लिए खर्च करना, अपने धन को केवल भोग विलास की वस्तु जैसे कार्य पर खर्च करना, यानि ऐसा काम जो धन के सहायता से गलत काम करना, यह सब धन से होने वाले पाप धनसा पाप होता है!

तो दोस्तों अब तो आप अच्छी तरह से जान गए होंगे की पाप कितने प्रकार के होते है!

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